श्री सूक्तम्: मूल १५ मंत्र, स्वरचिह्न और हिंदी भावार्थ

श्री सूक्तम् के १५ मूल वैदिक मंत्र और लक्ष्मी गायत्री सहित देवनागरी में पाठ, वैदिक स्वरचिह्न तथा हर मंत्र का मौलिक हिंदी भावार्थ पढ़ें।

श्री सूक्तम् क्या है?

श्री सूक्तम् देवी श्री अर्थात लक्ष्मी की वैदिक स्तुति है। इसके मंत्रों में तेज, अन्न, कीर्ति, स्थिरता और जीवन के कल्याण का वर्णन है। यहाँ परंपरागत १५ मूल मंत्र दिए गए हैं; प्रकाशित पाठ में संलग्न सोलहवें मंत्र के रूप में लक्ष्मी गायत्री भी रखी गई है। कुछ परंपराओं में फलश्रुति या अतिरिक्त मंत्र भी जुड़ते हैं।

वैदिक उच्चारण-सावधानी: इस पाठ में स्वरचिह्न स्रोत के अनुसार सुरक्षित रखे गए हैं। वेद मंत्रों के शुद्ध स्वर अभ्यास हेतु अपने वेदपाठी गुरु या प्रामाणिक परंपरा की मदद लें। रोमन रूप में सभी स्वरचिह्नों का सटीक मौखिक उच्चारण नहीं बताया जा सकता।

श्री सूक्तम् पढ़ें या दिवाली लक्ष्मी पूजा देखें।

श्री सूक्तम् — १५ मूल मंत्र एवं लक्ष्मी गायत्री

च॒न्द्रां॒ हि॒रण्म॑यीं ल॒क्ष्मीं॒ जात॑वेदो म॒ आव॑ह॥१॥

हिंदी भावार्थ: हे अग्निदेव, स्वर्ण जैसी दीप्ति वाली, मंगलमयी देवी लक्ष्मी का हमारे जीवन में आवाहन कीजिए।

यस्यां॒ हिर॑ण्यं वि॒न्देयं॒ गामश्वं॒ पुरु॑षान॒हम्॥२॥

हिंदी भावार्थ: ऐसी स्थिर लक्ष्मी की प्रार्थना है जो गौ, अश्व और जीवनोपयोगी संपदा के रूप में कल्याण लाए।

श्रियं॑ दे॒वीमुप॑ह्वये॒ श्रीर्मा॑दे॒वीर्जु॑षताम्॥३॥

हिंदी भावार्थ: देवी श्री को शक्ति और समृद्धि से युक्त, गजराज की घोष से सम्मानित स्वरूप में आमंत्रित किया जाता है।

प॒द्मे॒ स्थि॒तां प॒द्मव॑र्णां॒ तामि॒होप॑ह्वये॒ श्रियम्॥४॥

हिंदी भावार्थ: स्नेह, तेज, तृप्ति और कमल पर विराजने वाली देवी श्री का आह्वान है।

तां प॒द्मिनी॑मीं॒ शर॑णम॒हं प्रप॑द्येऽल॒क्ष्मीर्मे॑ नश्यतां॒ त्वां वृ॑णे॥५॥

हिंदी भावार्थ: यशस्विनी, उदार और प्रकाशमयी लक्ष्मी की शरण में जाकर अलक्ष्मी से निवृत्ति की याचना।

तस्य॒ फला॑नि॒ तप॒सा नु॑दन्तु मा॒यान्त॑रा॒याश्च॑ बा॒ह्या अ॑ल॒क्ष्मीः॥६॥

हिंदी भावार्थ: सूर्य-समान तेज वाली देवी के बिल्व-वृक्ष का उल्लेख कर बाधाओं को दूर करने की कामना।

प्रा॒दु॒र्भू॒तोऽस्मि॑ राष्ट्रे॒ऽ॒स्मि॒न्॒ की॒र्तिमृद्धिं॑ ददा॒तु मे॥७॥

हिंदी भावार्थ: दैवी मित्रता, कीर्ति और विकास के साथ प्रतिष्ठा और कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

अभू॑ति॒\-मस॑मृद्धिं॒ च सर्वां॒ निर्णु॑द मे॒ गृहात्॥८॥

हिंदी भावार्थ: भूख, प्यास, अभाव और असमृद्धि जैसी स्थितियों को घर से दूर करने की विनती।

ई॒श्वरीं᳚ सर्व॑भूता॒नां॒ तामि॒होप॑ह्वये॒ श्रियम्॥९॥

हिंदी भावार्थ: सर्वभूतों की ईश्वरी, पुष्टिदायिनी तथा सुगंध-समृद्धि से जुड़ी लक्ष्मी का आह्वान।

प॒शू॒नां रू॒पमन्न॑स्य॒ मयि॒ श्रीः श्र॑यतां॒ यशः॑॥१०॥

हिंदी भावार्थ: सच्चे वचन, शुभ संकल्प, अन्न, जीविका और यश की प्रार्थना।

श्रियं॑ वा॒सय॑ मे कु॒ले मा॒तरं॑ पद्ममा॒लिनीम्॥११॥

हिंदी भावार्थ: कर्दम का आह्वान कर कमलमालिनी श्री के कुल में निवास की कामना।

नि च॑ दे॒वीं मा॒तरं॒ श्रियं॑ वा॒सय॑ मे कु॒ले॥१२॥

हिंदी भावार्थ: स्नेह और पोषण देने वाले जल तथा चिक्लीत के माध्यम से घर में श्री के निवास की प्रार्थना।

सू॒र्यां हि॒रण्म॑यीं ल॒क्ष्मीं॒ जात॑वेदो म॒ आव॑ह॥१३॥

हिंदी भावार्थ: स्वर्णमयी, कमल-विकसित तथा सूर्य-समान तेजस्विनी लक्ष्मी के आगमन की प्रार्थना।

च॒न्द्रां हि॒रण्म॑यीं ल॒क्ष्मीं॒ जात॑वेदो म॒ आव॑ह॥१४॥

हिंदी भावार्थ: कमल-मालाधारिणी और स्वर्णाभ लक्ष्मी का पुनः आवाहन किया जाता है।

यस्यां॒ हिर॑ण्यं॒ प्रभू॑तं॒ गावो॑ दा॒स्योऽश्वा᳚न् वि॒न्देयं॒ पुरु॑षान॒हम्॥१५॥

हिंदी भावार्थ: स्थायी लक्ष्मी के रूप में बहुमुखी संसाधनों और समृद्ध जीवन की कामना।

तन्नो॑ लक्ष्मीः प्रचो॒दया᳚त्॥१६॥

हिंदी भावार्थ: यह लक्ष्मी गायत्री है: महादेवी, विष्णुपत्नी लक्ष्मी हमारे विवेक को प्रेरित करें।

वैदिक स्रोत: स्तोत्रसंहिता, वेदमंत्र संकलन — श्रीसूक्तम्। इस संस्करण का मंत्र १६ लक्ष्मी गायत्री है, जिसे मूल १५ से अलग समझें। स्वर और शब्द-भेद अन्य शाखाओं में हो सकते हैं।

यहाँ दिए गए छोटे हिंदी भावार्थ स्वतंत्र संपादकीय व्याख्या हैं; ये वैदिक पद-पद अनुवाद या प्रमाणित स्वरपाठ नहीं हैं। संगीत रिकॉर्डिंग को मौलिक बताकर प्रस्तुत नहीं किया गया है।

श्री सूक्तम् — सामान्य प्रश्न

श्री सूक्तम् में कितने मंत्र हैं?

इस संस्करण में १५ मूल मंत्र हैं, और उसके बाद सोलहवें क्रम पर लक्ष्मी गायत्री आती है। विभिन्न परंपराओं में अतिरिक्त मंत्र एवं फलश्रुति हो सकते हैं।

क्या इसे बिना गुरु के पढ़ सकते हैं?

साधारण अर्थ पढ़ना और भक्ति से स्मरण करना अलग बात है; वैदिक स्वरों के शुद्ध उच्चारण और अनुष्ठान के लिए योग्य आचार्य का मार्गदर्शन लेना उचित है।

संगीत वीडियो क्यों नहीं है?

ऐसा वीडियो जिसकी मूल रिकॉर्डिंग, पूर्ण पाठ और स्वरोच्चार विश्वसनीय रूप से सत्यापित न हो, उसे सम्मिलित नहीं किया गया।