छठ पूजा अर्घ्य मंत्र और विधि — परिचय
छठ महापर्व सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना का पर्व है। संध्या में अस्त होते सूर्य को और अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देना प्रमुख परंपरा है। इस लेख में सामान्य सूर्य-नमस्कार मंत्र दिए हैं; ये हर क्षेत्र की छठ पूजा के अनिवार्य या संपूर्ण लोकमंत्र नहीं हैं।
चारों दिनों की तैयारी, खरना और नहाय-खाय के लिए छठ पूजा २०२६ की विस्तृत गाइड देखें।
छठ पूजा २०२६ के अर्घ्य कब हैं?
संध्या अर्घ्य: रविवार, १५ नवंबर २०२६ को स्थानीय सूर्यास्त के निकट। उषा अर्घ्य: सोमवार, १६ नवंबर २०२६ को स्थानीय सूर्योदय के समय। किसी दूसरे शहर के समय को अपने घाट पर लागू न करें।
अर्घ्य की सामान्य सामग्री
स्वच्छ जल-पात्र, बाँस का सूप/डाला, नारियल, मौसमी फल और पारिवारिक रीति के अनुसार प्रसाद रखें। ठेकुआ और कसार जैसे व्यंजन कई क्षेत्रों में परंपरा का भाग हैं। प्लास्टिक या अन्य कचरा जलाशय में न छोड़ें।
संध्या-अर्घ्य की क्रमवार विधि
१. घाट की सुरक्षित तैयारी
दिन रहते पहुँचें। भीड़, फिसलन, गहराई और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था जाँचें; पानी में उतरना अनिवार्य नहीं है।
२. अस्त सूर्य का स्मरण
परिवार की प्रथा के अनुसार सूप व प्रसाद लेकर पश्चिम दिशा में अस्त होते सूर्य का ध्यान करें। पात्र से जल अर्पित कर श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें।
३. अगली सुबह की तैयारी
सामग्री स्वच्छ रखें और सूर्योदय का स्थानीय समय जाँचें। व्रती के स्वास्थ्य एवं आराम का ध्यान रखें।
उषा-अर्घ्य की क्रमवार विधि
सोमवार, १६ नवंबर की सुबह उगते सूर्य का स्मरण करते हुए पारिवारिक रीति से जल अर्पित करें। इसके बाद प्रसाद वितरण और व्रत-पारण होता है। समय और विधि में स्थानीय भिन्नता का सम्मान करें।
सरल सूर्य मंत्र और उनके अर्थ
ॐ सूर्याय नमः।
अर्थ: सूर्यदेव को प्रणाम।
ॐ आदित्याय नमः।
अर्थ: आदित्य अर्थात सूर्य को नमस्कार।
ॐ भास्कराय नमः।
अर्थ: प्रकाश देने वाले सूर्यदेव को प्रणाम।
छठी मैया के लोकगीत और क्षेत्रीय आराधना के पद अलग होते हैं। बिना अधिकार की आधुनिक गीत-रिकॉर्डिंग या गीतों के बोल यहाँ पुनर्प्रकाशित नहीं किए गए।
उपवास और घाट सुरक्षा
कठोर उपवास में निर्जलीकरण का जोखिम होता है। गर्भवती व्यक्तियों, मधुमेह या गुर्दे की समस्या वाले लोगों और बुजुर्गों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। अधिक भीड़ वाले घाट पर बच्चों की निगरानी रखें।
संदर्भ: बिहार पर्यटन — छठ पर्व तथा द्रिक पंचांग २०२६। विवरण एवं हिंदी अर्थ स्वतंत्र संपादकीय लेखन हैं।
सामान्य प्रश्न
छठ पूजा में संध्या अर्घ्य कब है?
१५ नवंबर २०२६ को स्थानीय सूर्यास्त के आसपास।
छठ उषा अर्घ्य कब है?
१६ नवंबर २०२६ को स्थानीय सूर्योदय के समय।
क्या ये मंत्र छठ के अनिवार्य लोकगीत हैं?
नहीं, ये संक्षिप्त पारंपरिक सूर्य-नमस्कार मंत्र हैं; परिवार की क्षेत्रीय परंपरा अलग हो सकती है।